SHARE

 

हृदय रोग और उसके आयुर्वेदिक उपचार क्या क्या है
अनियमित  नियंत्रित दिनचर्या एवं खान पा खान पा प्राकृतिक रहन सहन लंबे समय तक कवच  गैस बनने कीबनने की स्थिति फास्ट तथा जंक फूड का सेवन अत्याधिक प्रोटीन वसा एवं कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन भारी एवं वरिष्ठ गरिष्ठ आहार एसिडिटी मैं cholesterol  Dragonside की अत्यधिक मात्रा ना केवल ह्रदय रोग बल्कि मोटापा तथा मधुमेह जैसी लोगों के लिए भी जिम्मेदार है
हृदय रोग और उसके आयुर्वेदिक उपचार क्या क्या है
जब भोजन का पाचन नहीं होता और भोजन आमाशय तथा अन्य पाचन अंगों में एकत्र होकर सड़न पैदा कर देता है जिससे एक प्रकार के विषाक्त पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है और वह वक्त के साथ यूरिन एसिड परिवर्तित होकर गुर्दा में जाकर छनन क्रिया में  वादा उत्पत्ति कर देता है जब किडनी के जनन क्रिया भरपूर ढंग से नहीं हो पाती तो यूरिया प्रोटीन तथा अन्य द्रव रक्त  साथ के साथ हृदय में पहुंच जाते हैं जिससे रक्त में gadhapan  जाता  है उससे सूजन के साथ संधिवात तथा उच्च रक्तचाप की वृद्धि होती है
प्रोटीन वसा कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थों के अत्यधिक सेवन से कोलस्ट्रोल की उत्पत्ति होती है जो रक्त वाहिनी शिराओं में मोम की तरह  जमा होकर रक्त के प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर सांस लेने में कठिनाई पैदा करता है
हृदय रोग के जोखिम कारक क्या क्या है
1. उम्र – के साथ धमनियों के संकुचित होने से हृदय की मांसपेशियां कमजोर होती हैं
2. लिंग – पुरुष हृदय रोग के अत्याधिक जोखिम पर होते हैं रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं का जोखिम बढ़ जाता है
3. तंबाकू – निकोटिन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है कारबन मोनोऑक्साइड अतिरिक्त पर्थ को परत को नुकसान पहुंचाती है तथा उन्हें एलोरोसिरोसिस के प्रति संवेदनशील बनता बनाता है
4. आस्वस्थ आहार – डाइट में फैट नमक चीनी कोलेस्ट्रॉल अधिक होने पर
5. उच्च रक्तचाप – इसमें इससे धमनियों सख्त और मोटी हो जाती हैं जिससे रक्त वाहिकाओं संकुचित  होती हैं.
6. उच्च कोलेस्ट्रॉल – रक्त में इसकी अधिकता से एलोरास्केलरोसेस  का खतरा बढ़ जाता है
7. शुगर – से हृदय रोग का खतरा बढ़ जाpता है
8. मोटापा –  इससे जोखिम बढ़ जाता है
9. तनाव धमनियोंको नुकसान पहुंचा कर ह्रदय रोग उत्पन्न करता है.
10. स्वच्छता ना रखना – नियमित रूप से हाथ ना धोने और अस्वच्छ आदतों से वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण होते हैं जिससे हृदय के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है
11. खराब दंत स्वास्थ्य – इसके इससे भी हृदय रोग हो सकते  हैं
12. व्यायाम  करना
13. शराब या मादक पदार्थों का अत्याधिक सेवन
14.आप्राकृतिक जीवन शैली
15.भरपूर नींद का अभाव
16. दवाओं का दुरुपयोग
17.ज्यादा समय बैठ कर काम करना
हृदय रोग के लक्षण  संकेत क्या क्या है
1. छाती में भारीपनदबाव असुविधा या दर्द
2.ऊपरी शरीर में बार बार दर्द होना जैसे हाथों जबड़ा मैं
3. गर्दनपीठ या पेट के ऊपरी भाग में दर्द होना
4. सांस का फूलना
5. धड़कन में तेजी से वृद्धि आने अनियमित धड़कन
6. चक्कर आनापसीना आना,उल्टी आना
7. सूजन होना चिंतित रहना आदि
8. दर्द जलन  परिपूर्णता महसूस  करना
इलाज  जीवनशैली में परिवर्तन :-
इसमें कम वसा वाला खाना लेना ,कम सोडियम वाला आहार लेना ,निकोटीन परित्याग करना ,तथा रोज 30 मिनट का मध्यम व्यायाम करना शामिल है
हृदय रोग का आयुर्वेदिक इलाज :-
  • भारत में लगभग 3000 साल पहले पुस्तक अष्टांग हृदय हृदयम में क्षारीय चीजों के सेवन की सलाह दी है जैसे लौकीतुलसीपुदीनाइसके लिए रामबाण हैं रक्त में बड़ी  अम्लता को दूर करना पहला उपयोग है
  • अरंड तेल की 24 एमएम की मात्रा उपयोगी है
  • इत्यादि चायकॉफी ,तली सब्जियांखोया ,मलाई ,मक्खन ,अंडानारियलचॉकलेट ,आइसक्रीम से परहेज जरूरी है
  • तनाव रहित  प्रस्तचलित रहना चाहिए
  • शाकाहार प्राणायाम योग के जरिए निरोग रह सकते हैं
  • जीवन की समस्याओं के प्रति दार्शनिक ऊपर हो जाएं
  • भोजन के साथ अदरकलहसुनशॉर्ट ,मिर्च ,पीपललोंग ,तेजपातसेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए
  • रात में दूध में उबलते समय छोटी पीपलजायफल तथा हल्दी का चूर्ण मिलाकर 2 -2 ग्राम केसर के साथ डालकर सोने से पूर्व प्रयोग 
  • सुबह – शाम अर्जुननाग केसर ,दाल चीनीपुष्कर मूल ,जटा मासीतथा शिलाजीत युक्त औषधि रोग मु के सहायक हैं
  • रोगी को धीरेधीरे तथा लंबी सांस के साथ दोनों हाथ ऊपर नीचे करते रहना चाहिए इससे राहत मिलती है

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here